उत्तराखंड: तराई में सफेद कारोबार का काला गणित, बड़ा सवाल…28 हजार लीटर दूध से 35 क्विंटल पनीर-खोवा कैसे?
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर में दूध और उससे तैयार होने वाले पनीर-खोये की खपत को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े कई सवाल खड़े कर रहे हैं। जिले में रोजाना करीब 70 हजार लीटर दूध आने का दावा है। इसमें से 42 हजार लीटर दूध के रूप में खप जाता है, जबकि बाकी 28 हजार लीटर से प्रतिदिन करीब 20 क्विंटल पनीर और 15 क्विंटल खोया तैयार होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन उत्पादों को तैयार करने में लगने वाले दूध का हिसाब लगाने पर 8,500 लीटर दूध का अंतर सामने आ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक एक किलो पनीर तैयार करने में करीब छह लीटर दूध की जरूरत मानें तो 2,000 किलो पनीर के लिए 12 हजार लीटर दूध चाहिए। इसी तरह एक किलो खोया तैयार करने में करीब पांच लीटर दूध की जरूरत के हिसाब से 1,500 किलो खोये के लिए 7,500 लीटर दूध की आवश्यकता होगी। दोनों उत्पादों के लिए कुल 19,500 लीटर दूध लगेगा।
यदि दूध की कीमत 62 रुपये प्रति लीटर मानी जाए तो 19,500 लीटर दूध की कीमत करीब 12.09 लाख रुपये बैठती है। वहीं बाजार दर के हिसाब से 20 क्विंटल पनीर 300 रुपये किलो की दर से छह लाख रुपये और 15 क्विंटल खोया 350 रुपये किलो की दर से 5.25 लाख रुपये का होगा। दोनों की कुल बिक्री 11.25 लाख रुपये बैठती है। यानी केवल कच्चे दूध की लागत के मुकाबले ही करीब 84 हजार रुपये का अंतर है। इसमें कारीगर, बिजली, किराया और परिवहन जैसे अन्य खर्च शामिल नहीं हैं।
8,500 लीटर दूध का हिसाब सवालों में
70 हजार लीटर की कुल आवक में से 42 हजार लीटर सीधे दूध के रूप में खपने और पनीर-खोये के लिए 19,500 लीटर इस्तेमाल होने का हिसाब लगाने पर कुल 61,500 लीटर दूध का उपयोग सामने आता है। इस तरह करीब 8,500 लीटर दूध का हिसाब शेष रह जाता है। यही अंतर दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट की आशंका को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
सीएमओ डॉ. एस के गोस्वामी ने कहा कि मिलावटी दूध, पनीर, खोया और मिठाई का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मिलावटी खाद्य सामग्री शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा ललित मोहन पांडेय ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग सीमाओं से आने वाले वाहनों की लगातार जांच कर रहा है। इसके अलावा बाजार में मिठाई की दुकानों, डेयरियों और अन्य प्रतिष्ठानों पर भी चेकिंग की जा रही है। खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजे जा रहे हैं। लैब रिपोर्ट के आधार पर ही मिलावट की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
