रुद्रपुर : बिना फायर एनओसी के संचालित चार कोचिंग सेंटरों को नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब
रुद्रपुर। लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 बच्चों की मौत की घटना के बाद ऊधमसिंह नगर प्रशासन ने जिले में फायर सेफ्टी को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। फायर सेफ्टी ऑडिट के दौरान रुद्रपुर में बिना फायर एनओसी के संचालित चार कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया गया है। संबंधित संस्थानों से तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिले के अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) ईशान कटारिया और अग्निशमन अधिकारी (एफएसओ) महेश चंद्र के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने बुधवार को विभिन्न कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान गाबा चौक स्थित होराइजन इमिग्रेशन, आवास विकास स्थित कृष्णा आईएएस, नैनीताल रोड स्थित आकाश इंस्टीट्यूट और आवास विकास स्थित शिकर स्किल समेत कई संस्थानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई। टीम ने अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, उनकी कार्यशील स्थिति, आपातकालीन निकास व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा, आपदा प्रबंधन संबंधी तैयारियों तथा कर्मचारियों की आपात स्थिति से निपटने की क्षमता का परीक्षण किया।
दो दिनों से चल रहे इस विशेष अभियान में कई संस्थानों में फायर एक्सटिंग्विशर, होज रील और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी पाई गई। जांच में सामने आया कि चार कोचिंग सेंटर बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे थे। इसके बाद दमकल विभाग ने उन्हें नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
इस दौरान आवास विकास स्थित एक कोचिंग सेंटर में निरीक्षण के समय सीएफओ ने स्टाफ से फायर सेफ्टी संबंधी दस्तावेज, पंजीकरण और एनओसी की जानकारी मांगी, लेकिन वहां मौजूद कर्मचारी कोई भी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर सीएफओ ने प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए सेंटर की खामियों का विवरण दर्ज किया।
सीएफओ ईशान कटारिया ने बताया कि जिले में बगैर फायर एनओसी के संचालित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अभियान जारी है। चार संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं। यदि तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और फायर सेफ्टी ऑडिट आगे भी जारी रहेगा।
