उत्तराखंडउधमसिंह नगर

रुद्रपुर में हैरान करने वाला मामला: एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो कारें, चेसिस नंबर भी निकला समान; आधार कार्ड में भी मिली गड़बड़ी

रुद्रपुर। अलग-अलग लोगों के पास होने के बावजूद एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर से संचालित हो रही दो स्विफ्ट डिजायर कारों का मामला सामने आने के बाद संभागीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) में हड़कंप मच गया। शुरुआती जांच में दोनों वाहनों का चेसिस नंबर भी एक जैसा पाए जाने से मामला और गंभीर हो गया है। परिवहन विभाग ने दोनों वाहन मालिकों को कार्यालय बुलाकर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार ज्वालापुर निवासी सहदेव कुमार पाल मंगलवार को एआरटीओ कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उनके नाम पंजीकृत स्विफ्ट डिजायर कार का बीमा नवीनीकरण कराने के दौरान पता चला कि इसी रजिस्ट्रेशन नंबर से दूसरी कार का बीमा भी किसी अन्य व्यक्ति के नाम चल रहा है।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए परिवहन विभाग ने अपने रिकॉर्ड की जांच की। रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि यूके-06 एन-0807 नंबर की दूसरी स्विफ्ट डिजायर कार नैनीताल जिले के कालाढूंगी निवासी नीरज कुमार के नाम दर्ज है। इसके बाद विभाग ने नीरज कुमार को भी उनकी कार सहित एआरटीओ कार्यालय बुलाया।

दोनों वाहन जब एआरटीओ कार्यालय में आमने-सामने खड़े किए गए तो मामला और पेचीदा हो गया। दोनों कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर एक ही था। इसके बाद तकनीकी स्तर पर वाहनों की जांच की गई तो दोनों का चेसिस नंबर भी समान पाया गया। एक ही रजिस्ट्रेशन और एक ही चेसिस नंबर वाली दो अलग-अलग कारों के सामने आने से परिवहन विभाग के अधिकारी भी सकते में आ गए।

जांच के दौरान दस्तावेजों की पड़ताल की गई तो आधार कार्ड नंबर में भी समानता सामने आई। हालांकि दोनों व्यक्तियों की फोटो और जन्मतिथि अलग-अलग मिली। इससे दस्तावेजों के दुरुपयोग अथवा पहचान संबंधी दस्तावेजों में किसी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई है। परिवहन विभाग अब इस पहलू को भी जांच के दायरे में लेकर आगे बढ़ रहा है।

मामले की जांच में नीरज कुमार ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने कार कालाढूंगी के एक डीलर के माध्यम से खरीदी थी। डीलर ने वाहन के पूर्व मालिक से संबंधित जो दस्तावेज उपलब्ध कराए, उनमें सहदेव कुमार पाल के नाम का आधार कार्ड भी सामने आया। हालांकि जांच में आधार कार्ड नंबर सहदेव कुमार के नाम से जुड़ा पाया गया, लेकिन दस्तावेज में लगी फोटो और जन्मतिथि अलग थी। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि वाहन के दस्तावेज तैयार करने या पंजीकरण की प्रक्रिया में कहीं पहचान संबंधी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ।

विभागीय जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि संबंधित वाहन पहले रुद्रपुर निवासी एक चिकित्सक के नाम पंजीकृत था। इसके बाद वाहन के अलग-अलग लोगों के नाम ट्रांसफर होने का रिकॉर्ड सामने आया है। अब परिवहन विभाग वाहन के पुराने पंजीकरण रिकॉर्ड, स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज, बिक्री से संबंधित कागजात और डीलर की भूमिका की भी जांच कर रहा है।

अधिकारियों का प्रयास है कि वाहन के पूरे स्वामित्व इतिहास का पता लगाया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किस स्तर पर एक ही वाहन की पहचान से जुड़े दस्तावेज दूसरी कार तक पहुंचे।

मामले की तकनीकी पेचीदगी को देखते हुए स्थानीय मारुति एजेंसी की तकनीकी टीम की मदद ली जा रही है। टीम दोनों कारों की तकनीकी जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वास्तव में दोनों में से कौन सा वाहन संबंधित मूल रिकॉर्ड से मेल खाता है और दूसरे वाहन के चेसिस नंबर में किसी स्तर पर छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

तकनीकी रिपोर्ट में वाहनों के मूल निर्माण संबंधी विवरण, चेसिस और अन्य पहचान चिह्नों में अंतर स्पष्ट होने की उम्मीद है। परिवहन विभाग ने कहा है कि मारुति की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट और पुराने दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

इस पूरे मामले ने वाहन पंजीकरण और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि दो अलग-अलग कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर और चेसिस नंबर एक जैसा पाया गया है तो जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि रिकॉर्ड में यह विसंगति किस स्तर पर हुई।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर से दोनों वाहनों का बीमा कैसे जारी हुआ और अलग-अलग लोगों के नाम वाहन संबंधी दस्तावेज कैसे तैयार हुए। यदि दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा या नंबर से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो मामले में संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।

एआरटीओ प्रशासन मोहित कोठारी ने बताया कि दोनों वाहनों को कार्यालय बुलाकर जांच कराई जा रही है। एक वाहन की पहचान सही पाए जाने की दिशा में जानकारी मिली है, जबकि दूसरे वाहन के चेसिस नंबर की विस्तृत तकनीकी जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मारुति कंपनी की तकनीकी रिपोर्ट और पुराने दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

फिलहाल परिवहन विभाग ने दोनों वाहनों के दस्तावेजों और स्वामित्व रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एक ही रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर दो अलग-अलग कारों तक कैसे पहुंचा और इसके पीछे तकनीकी त्रुटि, दस्तावेजों का दुरुपयोग या जानबूझकर की गई छेड़छाड़ में से क्या कारण रहा।

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