उत्तराखंड : सरकारी वेबसाइट पर नीर वाटरफॉल का नाम नहीं, वर्ष भर सैलानियों से गुलजार रहता है झरना
उत्तराखंड। जिस नीर झरने की खूबसूरती देखने देश-विदेश से पर्यटक खिंचे चले आते हैं, उसे सरकारी सिस्टम ने कागजों (वेबसाइट) में भुला दिया है। एनआईसी टिहरी की साइट पर झरने (नीर वाटरफॉल) का नाम न होने से स्थानीय लोगों का पारा चढ़ गया है। ग्रामीणों के विरोध के बीच अब विभाग अपनी इस भूल को सुधारने की बात कह रहा है।
संवाद न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के टिहरी की जो साइट है, उसमें टिहरी जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में नई टिहरी, धनोल्टी, काणाताल, देवप्रयाग, नरेंद्रनगर और चंबा का नाम दर्ज है। इसमें नीर वाटरफॉल का नाम नहीं है।
नीर वाटरफाॅल ऋषिकेश से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बदरीनाथ हाईवे से इसकी दूरी दो किलोमीटर है। यहां पर्यटक मनोरम दृश्य देखने व झरने के नीचे नहाने के लिए आते हैं। एनआईसी साइट में नीर वाटरफॉल का नाम दर्ज न होने से क्यार्की के ग्राम लक्की रावत, शूरवीर रावत, विकास कैंतुरा ने विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि एनआईसी की साइट पर वाटरफॉल का न होना गलत है।
नीर झरना विकास समिति के अध्यक्ष त्रिलोक सिंह ने कहा कि एनआईसी की साइट पर नीर वाटरफॉल का रहना चाहिए। एनआईसी की साइट पर नाम जुड़वाने के लिए जिला पर्यटन अधिकारी, प्रभारी एनआईसी टिहरी और एसडीएम नरेंद्रनगर को पत्र लिखा जाएगा, जिससे नीर वाटरफॉल का नाम जुड़ सके।
टिहरी गढ़वाल के जिला पर्यटन अधिकारी सोबत सिंह राणा ने बताया कि एनआईसी की साइट से नीर झरना नाम नहीं होने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। जल्द ही इस बारे में संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर नाम जुड़वाया जाएगा।
