रुद्रपुर: नाबालिग छात्रों के हाथों में वाहन, सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
रुद्रपुर। जिस उम्र में बच्चों के कंधों पर स्कूल बैग होना चाहिए, उसी उम्र में कई नाबालिग छात्र बाइक और स्कूटी के हैंडल थामे सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते नजर आ रहे हैं। शहर के मुख्य मार्गों पर स्कूल ड्रेस में बिना हेलमेट वाहन चलाते छात्र आम दृश्य बनते जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद परिवहन और शिक्षा विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
स्कूलों की छुट्टी के समय अक्सर छात्र अपने दोस्तों को बाइक और स्कूटी पर बैठाकर तेज गति से वाहन चलाते दिखाई देते हैं। यह न केवल उनकी जान को खतरे में डाल रहा है, बल्कि सड़क पर अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन रहा है। कई मामलों में अभिभावक बच्चों के शौक के चलते उन्हें वाहन उपलब्ध करा देते हैं, लेकिन यही लापरवाही कानूनी परेशानी का कारण बन सकती है।
एक ओर पुलिस स्कूलों में यातायात नियमों को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्कूलों में छात्रों के लिए पार्किंग व्यवस्था होने से नाबालिगों के वाहन लाने को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे में स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि परिसर में नाबालिग छात्रों द्वारा लाए गए वाहनों पर सख्ती से रोक लगाई जाए और अभिभावकों को जागरूक किया जाए।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत नाबालिग का वाहन चलाना गंभीर अपराध माना गया है। यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते पकड़ा जाता है तो वाहन मालिक या अभिभावक को जिम्मेदार ठहराया जाता है। ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक का जुर्माना और अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन एक वर्ष तक निलंबित किया जा सकता है। नियमों के अनुसार संबंधित नाबालिग को 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक क्राइम जितेंद्र चौधरी ने बताया कि छात्रों को समय-समय पर यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाता है। यदि कोई छात्र नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों को वाहन न देने और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की।
