उधमसिंह नगर

रुद्रपुर में सोया सिस्टम… सड़कें बन रहीं लावारिस पशुओं का ठिकाना

रुद्रपुर। शहर में लावारिस पशुओं की बढ़ती संख्या अब यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है। प्रमुख सड़कों पर कहीं पशु बीच मार्ग में बैठे नजर आ रहे हैं तो कहीं झुंड बनाकर घूमते दिखाई दे रहे हैं। इससे वाहन चालकों को रफ्तार नियंत्रित करने के साथ कई बार रास्ता बदलकर निकलना पड़ रहा है। व्यस्त मार्गों पर सड़क के बीच बैठे पशुओं के कारण हादसे की आशंका भी बनी रहती है।

मीडिया द्वारा शनिवार रात और रविवार दोपहर शहर के विभिन्न मार्गों की पड़ताल में सिडकुल ढाल, किच्छा रोड, काशीपुर रोड, सिडकुल कट और पंतनगर रोड समेत कई स्थानों पर बेसहारा पशु सड़क पर दिखाई दिए। कई जगह पशु सड़क के बीचोंबीच बैठे मिले, जबकि कुछ स्थानों पर उनका झुंड सड़क किनारे और मार्ग पर घूमता नजर आया। व्यस्त सड़कों पर इनकी मौजूदगी से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती रही।

स्थिति कई जगह ऐसी रही कि वाहन चालकों को खुद नीचे उतरकर पशुओं को सड़क से हटाना पड़ा। वहीं, एक साथ कई पशु सड़क पर आ जाने के कारण वाहनों के निकलने के लिए सीमित जगह ही बची। खासकर रात के समय कम रोशनी वाले स्थानों पर सड़क पर बैठे पशु वाहन चालकों के लिए अचानक सामने आने वाली बाधा बन सकते हैं।

एक बार पकड़कर छोड़ने से नहीं सुधरेगी तस्वीर, चाहिए लगातार निगरानी

बेसहारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान केवल उन्हें सड़क से हटाने तक सीमित नहीं है। पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजने के बाद यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि वे दोबारा सड़कों पर न पहुंचें। इसके लिए नगर निगम को संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर नियमित निगरानी की व्यवस्था करनी होगी।

सिर्फ अभियान चलाकर कुछ पशुओं को पकड़ लेने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। धरपकड़ के साथ यह भी निगरानी करनी होगी कि पशु दोबारा शहर की प्रमुख सड़कों और बाजार क्षेत्रों में न पहुंचें।

कूड़ा हटे तो सड़कों पर पशुओं की आवाजाही भी घटे

सड़कों पर बेसहारा पशुओं के जमावड़े की एक बड़ी वजह खुले में पड़ा खाद्य कचरा भी है। बाजारों और आबादी वाले इलाकों में बचा हुआ खाना और अन्य कचरा सड़क किनारे पहुंचते ही पशु वहां एकत्र होने लगते हैं। कुछ देर बाद यही पशु सड़क के बीच तक पहुंच जाते हैं और यातायात प्रभावित होने लगता है।

ऐसे में पशुओं की धरपकड़ के साथ कूड़ा प्रबंधन को भी अभियान का हिस्सा बनाना जरूरी है। खुले में खाद्य कचरा डालने पर रोक, नियमित सफाई और कचरे के उचित निस्तारण से पशुओं के सड़क किनारे जमावड़े को कम किया जा सकता है।

शहरवासियों का कहना है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए नियमित धरपकड़, निगरानी और बेहतर कूड़ा प्रबंधन की जरूरत है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग सड़क पर घूमते बेसहारा पशुओं की समस्या को लेकर कितनी गंभीरता दिखाते हैं।

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