रुद्रपुर : भड़काऊ भाषण मामले में मौलाना मुफ्ती मुजीब अहमद को झटका, अदालत ने जमानत याचिका की खारिज
रुद्रपुर। बारावफात के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के मामले में आरोपी मौलाना मुफ्ती मुजीब अहमद को अदालत से राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, ऊधम सिंह नगर की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामला थाना रुद्रपुर में दर्ज एफआईआर संख्या 434/2026 से संबंधित है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(2) और 152 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को बारावफात के अवसर पर त्रिशूल चौक पर धार्मिक जुलूस के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर ऐसा भाषण दिया, जिससे धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका थी। जांच के दौरान मामले में BNS की धारा 152 भी जोड़ी गई। इसके बाद आरोपी को 29 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश किया गया।
जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने में हुई देरी का मुद्दा भी अदालत के समक्ष उठाया गया।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी के भाषण में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिनसे विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य और तनाव उत्पन्न हो सकता था। अभियोजन ने जांच के दौरान एकत्र किए गए वीडियो साक्ष्यों का भी हवाला दिया।
अदालत ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत वीडियो सामग्री का प्रथमदृष्टया अवलोकन करने के बाद माना कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के प्रतीत होते हैं। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी के जमानत पर बाहर आने की स्थिति में गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
मामले की गंभीरता और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अदालत ने आरोपी को इस स्तर पर जमानत दिए जाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया। इसके बाद अदालत ने मौलाना मुफ्ती मुजीब अहमद की ओर से दाखिल जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
